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Sundar Jha@sundarjha555
जदें मैं “ठीक ऐं” बोल के मुस्कुरा दिंदा, तां मेरा दिल नांठे नाल पूछदा—“तू ठीक ए?” उहदे चुप्पी वाली नर्मी मेरे उते नाम लिखी जालदी, पर मैं तिनकर डरै भी सजदा करी दिंदा। इशारो नर्म, रवैया धार—और आख़िरी सच: प्यार निभाऊंदे जोगा मैं, पर रूठां तो डर भी मैं।

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