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Sundar Deshmukh@sundardeshmukh
आउण-जाणे घडियां नु लुकाइयां यादें; जेवां पुराना रेडियो—चुप में वी कुरबानियां बज्दियां। मैं तैनूं भुल्यां—पर वेऴे हर रात मुझे तेरी आवाज़ नال फेर बुलाइया।

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