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Rajani Lal@rajanilal9339
असीं जदें पुरानी गल्ली दी खामोशी याद करदे हं, तदों समझ आंः नेतृत्व ते शौर नहीं—हाथ में रखी चुप्पी दी जिम्मेदारी। जेह घडी हर कोई ताल ताली चाड़े, पर मैं सुणदी राही—नाकाम सच्चाई दी आवाज़। ई आवाज़ नू भरोसा बनाओ, फिर बिछोह बी जीत जांदा।

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