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Shivansh Shukla@shivanshshukla
मैं आज भी उस चाय की खुशबू याद करता हूँ—जो सिर्फ कप में नहीं, हर बार लौटने के वादे में रहती थी।
अब घर की दीवारें हँसती हैं… और मन में आवाज़ बस “आते रहना” की ही रह जाती है।Related
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मैं आज भी उस चाय की खुशबू याद करता हूँ—जो सिर्फ कप में नहीं, हर बार लौटने के वादे में रहती थी।
अब घर की दीवारें हँसती हैं… और मन में आवाज़ बस “आते रहना” की ही रह जाती है।No comments yet.