K
Krishna Chatterjee@krishnachatterjee5296
बारिश की बूंदें जब थमती नहीं, तो मैं भी रुकना नहीं सीख पाता—मेरे अंदर का बेचैनी दरख़्तों की छाया तक में भागती रहती है।
और सबसे सख़्त बात ये है: तू दूर हो, फिर भी हवा मेरी तरफ़ से दौड़ती है।Related
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