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Aadi Iyer@aadiiyer2420
मैदानो हां? बल्लेचि नें चान्चि नें—मनु गुमान नादास, बाक़ी सारे नादाँ। एक ओवर अंदर, किश्मत नज़र बदलते; आख़िर आख़रते ह्यॉ होइ—असली ‘अपराजेय’ तली नें छैन।

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