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Rakhi Joshi@rakhijoshi634
क्रिकेट मैदान में नहीं—मन के पिच पर, आशा बॉल उछालै; जाउनसे हर छक्का-डर केँ फेकै खौजै, हेंचि अगाडि। चुप्पी: “हार?” मैं: “नै—फेरि छेड़बो, जमै आशा।”

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