Main ja raha tha ghar, dekh liya pariyon ka asar… Kandh se bhaga darr, kyunki pari ka par tha idhar 🧚‍♀️

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रात के 2 बज रहे थे। आरव एकदम अकेला, मोबाइल की स्क्रीन की रोशनी में डूबा था। बाहर बारिश ऐसी कि हर चमक के साथ छत काँपती लगी… और बिजली—जैसे डर को गिनती हो। तभी अनजान नंबर से पहला मैसेज टपका: “खिड़की मत खोलना।” आरव हँसा—“मज़ाक है।” उसने इग्नोर कर दिया। कुछ देर बाद दूसरा मैसेज: “मैं तुम्हारे घर के बाहर खड़ा हूँ।” अब हँसी गले में अटक गई। अँधेरे में कुछ नहीं दिखता था, फिर भी उसे लगा कोई है—एकदम पास। तीसरा मैसेज आया, और शब्दों ने धड़कन तोड़ दी: “मैं बाहर नहीं… तुम्हारे घर के अंदर हूँ।” आरव ने फौरन पूरे घर की लाइटें जला दीं। हर कोना उजला—फिर भी हवा ठंडी। ऊपर से… ठक… ठक… ठक… सीढ़ियों के ऊपर कदमों की लय। घर में उसके अलावा कोई नहीं था। वह धीरे-धीरे चढ़ा। आवाज़ अचानक… बंद। और फिर उसने दरवाज़ा देखा—एक कमरा, जो सालों से बंद था… अभी खुला था। मानो किसी ने रात को “स्वागत” पहले ही भेज दिया हो।
6/2/2026
R
Rahul Dangi@compumindxma
एक बार की बात है में ट्रेन से पुणे जा रहा था तभी अचानक ट्रेन रुकी और में सोचने लगा क्या हुआ जो अचानक जंगल में ट्रेन रुक गई लेकिन थोड़ी देर बाद ट्रेन चल पड़ी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा मैने जाके गेट के पास खड़ा होके खुली हवा का मजा लू लेकिन जब में पहुंचा तो गेट पे एक व्यक्ति बैठा हुआ था अजीब सी धुन में मैने ज्यादा ध्यान ना देते हुए सीधा वॉशरूम चला गया बापिस आने के बाद में गेट से दूर खड़ा हो गया और देख रहा उस व्यक्ति को ध्यान से मैने उसको ध्यान से देखा तो उसके पैर के हिस्से से उसका पेंट हवा में उड़ता नजर आ रहा था मैं उसका चेहरा देखना चाह रहा था लेकिन उसका चेहरा बाहर की तरफ था तो चेहरा सही से नजर न आये बाल बड़े बड़े होने के कारण तभी मैने पूछा भाई अंदर बैठ जाते लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया थोड़ी देर बाद वह देखते ही देखते अचानक से गायब हो गया में थोड़ा डर गया और में अन्दर आके मेरे सीट पर लेटकर सोचने लगा आखिर था आज भी वह.......
5/29/2026

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