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Manu Rathor@rathormanu97
कनहार गाँव की मिट्टी में लिखी गई एक कहानी, जहाँ बंसीधर राठौर और कृपावाई ने अपने सात बच्चों को सिखाया कि खेत की हर बूँद पसीना जब एकता से सींची जाए, तो वही फसल सफलता बनकर लहलहाती है। सूर्योदय से पहले खेतों में उतरना और अंधेरा होने तक जुटे रहना, यही उनकी पूँजी थी और यही उनका सपना।

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