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Vaman Tiwari@vamantiwari7Aawaz
Agar main PM hota to na ST dekhata na SC, na OBC na General. Sabke liye ek hi kanoon, ek hi nyaay, ek hi adhikar. Galti kisi ki bhi ho, saja barabar. Yahi hoti sacchi barabari.

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News Balhara@newsbalhara
हर दिन करीब 81 बलात्कार… 4.48 लाख महिलाओं के खिलाफ अपराध! हर दिन 81 बलात्कार, हर साल लाखों बेटियां शिक्षा से दूर—ये कैसा अमृतकाल? जब देश चांद और अंतरिक्ष की उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, उसी देश में महिलाओं की सुरक्षा और बेटियों की शिक्षा आज भी गंभीर सवाल बनी हुई है। NCRB के 2023 के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ 4,48,211 अपराध दर्ज हुए। इनमें 29,670 बलात्कार के मामले शामिल हैं—यानी औसतन करीब 81 मामले प्रतिदिन। इसके अलावा 1,33,676 मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के और 6,156 दहेज हत्या के मामले दर्ज हुए। और याद रखिए—ये केवल दर्ज मामले हैं। हर घटना पुलिस तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं। अपराध का डर बेटियों की पढ़ाई तक पहुंच गया? विभिन्न शोधों और शिक्षा संबंधी अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि सुरक्षा, स्कूल की दूरी और आने-जाने की असुविधा लड़कियों की शिक्षा जारी रखने में बड़ी बाधाएं हैं। पिछले कुछ वर्षों में करीब 30 लाख लड़कियों के सेकेंडरी स्तर के बाद स्कूल छोड़ने का दावा भी सामने आया है। हालांकि इस संख्या को सीधे तौर पर केवल “अपराध के डर” से जोड़ना सावधानी मांगता है। लेकिन सवाल फिर भी वही है— अगर बेटी स्कूल तक सुरक्षित नहीं पहुंच सकती, तो शिक्षा का अधिकार अधूरा है। एक लड़की डॉक्टर बन सकती थी… इंजीनियर बन सकती थी… शिक्षक, वैज्ञानिक या अधिकारी बन सकती थी… लेकिन अगर रास्ते की असुरक्षा, छेड़छाड़, परिवहन की कमी या सामाजिक डर उसकी पढ़ाई रोक देता है, तो नुकसान सिर्फ उस परिवार का नहीं—पूरे देश का है। अब भाषण नहीं, जवाब चाहिए! स्कूलों तक सुरक्षित और सस्ता परिवहन संवेदनशील और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था मामलों की तेज जांच और निष्पक्ष न्याय स्कूल-कॉलेजों के आसपास बेहतर सुरक्षा लड़कियों को रोकने के बजाय लड़कों को सम्मान और समानता की शिक्षा बेटियों से यह कहना बंद करना होगा कि “सावधान रहो, अकेले मत जाओ, चुप रहो।” सवाल यह होना चाहिए कि— अपराधी को कैसे रोका जाए? चांद पर पहुंचना देश की उपलब्धि है। लेकिन धरती पर अपनी बेटियों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाना भी उतनी ही बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। जब तक एक बेटी डर के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर है, तब तक विकास के दावों पर सवाल उठते रहेंगे।
9/1/2026

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