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Suresh@sssuresh431
नारायण नारायण जप्दै हिंडु जस्ताे लाग्छ ढाेंगीहरु धर्म गर्दा कस्ताे कस्ताे कस्ताे लाग्छ शिर झुकी पाउमा म, टक्र्याउँदा मख्ख पर्छन् आफ्नाे अनि पराई, मलाई उस्तै उस्ताे लाग्छ

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JAFAR ANSARI@jafaransari1
कहानी काठमांडू (नेपाल) से शुरू होती है, जहाँ हाकु काले (सौगात मल्ल) नाम का एक व्यक्ति गरीबी से तंग आ चुका है। वह अपनी किस्मत बदलना चाहता है और बैंक लूटने का एक बड़ा मास्टरप्लान बनाता है । इस काम के लिए उसे ऐसे साथियों की तलाश होती है, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत हो और जो किसी भी हद तक जा सकें।वह चार लोगों की एक टीम तैयार करता है:खत्री (प्रतीक राज): जो ड्रग्स का छोटा-मोटा धंधा करता है।नरे (कर्मा शाक्य): जो एक गैंबलर (जुआरी) और बाउंसर है।गोफ्ले (दयाहांग राय): एक बेरोजगार युवक।पांडे (सुशील राज पांडेय): गोफ्ले का दोस्त, जो भी बेरोजगार है।प्लानिंग और ट्रेनिंगहाकु काले इन चारों को समझाता है कि वे कैसे बैंक को लूटेंगे। सभी का काम तय किया जाता है: गोफ्ले बैंक के गार्ड्स को संभालेगा, खत्री और पांडे ग्राहकों को एक कमरे में बंद करेंगे, और नरे बैंक मैनेजर को डराकर तिजोरी खुलवाएगा। हाकु काले खुद पहले से बैंक के अंदर मौजूद रहेगा और सिग्नल देगा।इस खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए वे 5 महीने तक तैयारी करते
5/31/2026
9/2/2025
9/2/2025

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