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HYP@oversochingladkiDialogbaaz
ڈراونی فلم کے بنانے والو، دروازے کو تیل کیوں نہیں لگاتے؟ “چررر” کی آواز ہی آدھی جان نکال دیتی ہے! 😱

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Black Heart@heartblackcr
রামনগর ছোট্ট, শান্ত—একপাশে ঘন জঙ্গল, অন্যপাশে ভুলে যাওয়া পুরনো শ্মশান। রাত বারোটার পরে সেখানে নাকি শোনা যায় বাঁশির সুর—কারও পক্ষে খুঁজে বের করা সম্ভব হয়নি। অর্ণব নামের এক যুবক ভূতের গল্পে বিশ্বাস করত না। কুসংস্কারগুলোকে সে শুধু মানুষের বানানো ছায়া মনে করত। একদিন সন্ধ্যায় বন্ধুরা যখন সাবধান করল, সে হেসে বলল, আজ রাতেই শ্মশানে যাব—বাঁশি কে বাজায়, দেখে আসব। বারোটার কিছু আগে টর্চ হাতে সে রওনা দিল। আকাশে মেঘ জমে ছিল, চাঁদ যেন আড়ালেই রয়ে গেছে। নীরবতা এমন ভারী যে নিজের শ্বাসও যেন শোনা যায়। শ্মশানে গিয়ে সে টর্চের আলো ছড়াল চারদিকে—কাউকে দেখা গেল না। পুরনো সমাধি, পোড়া কাঠের গন্ধ আর শুকনো পাতার মচমচ শব্দ ছাড়া কিছু নেই। তারপর হঠাৎ—দূর থেকে বাঁশির ধীর, বিষণ্ণ সুর ভেসে এল। অর্ণব থমকে দাঁড়াল। সুরটা যত কাছে আসছে, তত যেন তার বুকের ভেতর কোনো পুরনো স্মৃতি জেগে উঠছে। আর সে বুঝতে পারল—এই শব্দের উৎস খোঁজা মানে, নিজের ভয়টা খুঁজে বের করা।
6/12/2026
रात के 2 बज रहे थे। आरव एकदम अकेला, मोबाइल की स्क्रीन की रोशनी में डूबा था। बाहर बारिश ऐसी कि हर चमक के साथ छत काँपती लगी… और बिजली—जैसे डर को गिनती हो। तभी अनजान नंबर से पहला मैसेज टपका: “खिड़की मत खोलना।” आरव हँसा—“मज़ाक है।” उसने इग्नोर कर दिया। कुछ देर बाद दूसरा मैसेज: “मैं तुम्हारे घर के बाहर खड़ा हूँ।” अब हँसी गले में अटक गई। अँधेरे में कुछ नहीं दिखता था, फिर भी उसे लगा कोई है—एकदम पास। तीसरा मैसेज आया, और शब्दों ने धड़कन तोड़ दी: “मैं बाहर नहीं… तुम्हारे घर के अंदर हूँ।” आरव ने फौरन पूरे घर की लाइटें जला दीं। हर कोना उजला—फिर भी हवा ठंडी। ऊपर से… ठक… ठक… ठक… सीढ़ियों के ऊपर कदमों की लय। घर में उसके अलावा कोई नहीं था। वह धीरे-धीरे चढ़ा। आवाज़ अचानक… बंद। और फिर उसने दरवाज़ा देखा—एक कमरा, जो सालों से बंद था… अभी खुला था। मानो किसी ने रात को “स्वागत” पहले ही भेज दिया हो।
6/2/2026
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Rahul Dangi@compumindxma
एक बार की बात है में ट्रेन से पुणे जा रहा था तभी अचानक ट्रेन रुकी और में सोचने लगा क्या हुआ जो अचानक जंगल में ट्रेन रुक गई लेकिन थोड़ी देर बाद ट्रेन चल पड़ी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा मैने जाके गेट के पास खड़ा होके खुली हवा का मजा लू लेकिन जब में पहुंचा तो गेट पे एक व्यक्ति बैठा हुआ था अजीब सी धुन में मैने ज्यादा ध्यान ना देते हुए सीधा वॉशरूम चला गया बापिस आने के बाद में गेट से दूर खड़ा हो गया और देख रहा उस व्यक्ति को ध्यान से मैने उसको ध्यान से देखा तो उसके पैर के हिस्से से उसका पेंट हवा में उड़ता नजर आ रहा था मैं उसका चेहरा देखना चाह रहा था लेकिन उसका चेहरा बाहर की तरफ था तो चेहरा सही से नजर न आये बाल बड़े बड़े होने के कारण तभी मैने पूछा भाई अंदर बैठ जाते लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया थोड़ी देर बाद वह देखते ही देखते अचानक से गायब हो गया में थोड़ा डर गया और में अन्दर आके मेरे सीट पर लेटकर सोचने लगा आखिर था आज भी वह.......
5/29/2026

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