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Rakhi Varma@rakhivarma819
हम आशा नहि छोड़ैत छी—अटकलकँ जेकाँ नभक आगाँ धूप टिकैत छैक; आ गामकँ चुल्हि पर नानीक गप्प जेकाँ, अँचरैत मनो पुच्छैत रहैत अछि: “आउ कोना चमकब?”

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7/13/2026
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