A
Advik Ghosh@advikghosh
आँखि में आश्चर्य क’ए बिसरैत छी—हँसला के बादो तकरा मौन क’ए दुखि रहैत अछि।
क’हियो नै कहियैक चाही, जखन बुझि जाइत छिअः किछु दूरी अपनहि संगे चलैत रहैत अछि।Related
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आँखि में आश्चर्य क’ए बिसरैत छी—हँसला के बादो तकरा मौन क’ए दुखि रहैत अछि।
क’हियो नै कहियैक चाही, जखन बुझि जाइत छिअः किछु दूरी अपनहि संगे चलैत रहैत अछि।No comments yet.