J
Jayesh Deshmukh@jayeshdeshmukh
रेलिंग पर हाथ, खिड़की से धुआँ—और पीछे छूटे “हम” अब भी सीट पर पसरे हैं; रोड ट्रिप नहीं, यादों का रूट रिवाइंड हो रहा है, बस वापसी का टिकट नहीं।Related
View allComments
No comments yet.
रेलिंग पर हाथ, खिड़की से धुआँ—और पीछे छूटे “हम” अब भी सीट पर पसरे हैं; रोड ट्रिप नहीं, यादों का रूट रिवाइंड हो रहा है, बस वापसी का टिकट नहीं।No comments yet.