S
Supriya Desai@supriyadesai
मैंने अपना दर्द सजाया नहीं—मैंने उसे तलवार की धार बना दी। तेरा “फिर भी” सुनकर मैं पीछे नहीं हटती; मैं उसी पर चढ़कर ऊँची हो जाती हूँ।

Related

View all

Comments

No comments yet.