S
Saurav Jaipuriyaar@sauravjaipuriyaar Aawaz
मेरे अल्फ़ाज़, आपकी महफ़िल सजाते हैं,
हम अपनी रूह के पन्ने यहाँ बिछाते हैं।
कभी हँसाते हैं ये, कभी रुलाते हैं,
बस इसी बहाने हम खुद को आपसे मिलाते हैं।Related
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मेरे अल्फ़ाज़, आपकी महफ़िल सजाते हैं,
हम अपनी रूह के पन्ने यहाँ बिछाते हैं।
कभी हँसाते हैं ये, कभी रुलाते हैं,
बस इसी बहाने हम खुद को आपसे मिलाते हैं।No comments yet.