A
Ankit Sharma@deepsharma76Syahi
तुम मेरी परछाई थी, हर कदम पर साथ रहने वाली। मुझे गुमान था कि धूप ढलेगी तो परछाई भी ओझल होगी, पर मुझे नहीं पता था कि धूप रहने पर भी तुम मुझसे दूर चली जाओगी। अब मैं अकेला हूँ, बिना साये के, सूरज की तपिश में झुलसता हुआ। तुमने जीना सिखाया था, अब मरने के लिए अकेला छोड़ दिया।

Related

View all

Comments

No comments yet.