A
Aspak Saiyad@aspaksaiyad1Creator
किस्मत की लकीरों में आप ही को देखता हूँ,
दिल के हर एक आईने में आप ही को देखता हूँ।
ये कैसा इश्क़ मेरा, ज़रा आप ही बता दो,
मैं जब भी रातों को सोता हूँ, ख्वाबों में आप ही को देखता हूँ।
मेरे दिल की हर धड़कन आप ही का नाम लेती है,
मेरी ज़ुबाँ भी हर घड़ी, हर पल आप ही का नाम लेती है।
मैं समझ नहीं पा रहा हूँ अपने इस दिल के जज़्बात को,
मैं समझ नहीं पा रहा हूँ इस मोहब्बत के एहसास को।
मैं अपनी निगाहों से जिधर देखता हूँ,
जहाँ देखता हूँ, आप ही को देखताSponsored
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