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Ananya Shukla@ananyashukla7048
सौंन्दर्य मायाजाल नहि—ए त अहाँक आशा आंचरमे गढ़ल गेल चुपचाप उजियार। जेहन करेज देखए देल, ओही मुँह पर चमकि उठैत; जेहन आशा रखैत, ओही नजरि नहि टुटैत।

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