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Pallavi Ganguly@pallaviganguly
बीते बरसातक गंध आ जुनका के कंघी—एहने मोर सौंदर्यक याद करबैत अछि। जे काजल आँखि में ठहरि गेलन्हि, ओ सिर्फ सुरत छलन्हि; तकरा बाद उमेदक नमक बस चुभैत रहि गेलनि।

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