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Supriya Singh@supriyasingh2518
सुबह की ओस को देखकर मैं समझती हूँ—टूटी हुई रात भी एक दिन अपना ही रंग उगा देती है। और अगर उम्मीद डरती है, तो मैं उसे चुपचाप सींचती हूँ… जब तक वो टूटे हुए दिल में भी जड़ें न पकड़ ले।

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7/15/2026

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