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Chandni Ghosh@chandnighosh8899
झिरमिरा गेल झर-झंखार, मुदा मोन नहि भींजल—किएक त फेर नीक लागैत अछि जे दूरसँ नहि, पास रहितो गप-चुप हमरा बीचें ठंठुक लागबैत अछि।
बरखा आ फेरो, आँसू आ फेरो—ई दूटा हाथ पकड़ैत अछि, मुदा ठाम नहि मिए ठहरैत।Related
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