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Dhaval Seth@dhavalseth7415
वट-वृक्ष के छाँव में हम हँसैत छलहुँ—बादल जकाँठ परिछन, आ हम परिछन शैतानीक ठंढ।
हवा के कुहासा: “चुप रह!”
हमरा नै: “अहाँ-ए मौसम हम्मर शरारत बनइत अछि।”Related
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