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Parth Sharma@parthsharma2020
नदी के किनार पर शरारत करैत छी—चिंता कऽ बहाबैत छी, मुदा भीतर ई दहकन… जखन जल रुकि जाइत अछि, तखन हमार हँसी फेरि फूटैत अछि।

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7/15/2026

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